व्रजराज टीम, गोवर्धन · अंतिम बार जाँचा गया
गोवर्धन परिक्रमा, मथुरा ज़िले के ब्रज क्षेत्र में गिरिराज जी (गोवर्धन पर्वत) के चारों ओर लगभग 21 किलोमीटर की पैदल यात्रा है। भक्त गिरिराज जी को अपने दाहिनी ओर रखते हुए परिक्रमा करते हैं, और ज़्यादातर गोवर्धन कस्बे के दानघाटी मंदिर से शुरू करके वहीं समाप्त करते हैं। पैदल इसमें 5 से 8 घंटे लगते हैं। हर पूर्णिमा, गोवर्धन पूजा और मुड़िया पूर्णिमा मेले पर सबसे ज़्यादा भीड़ होती है।
| दूरी | लगभग 21 किलोमीटर (सप्तकोसी, 7 कोस) |
|---|---|
| पैदल समय | पूरी परिक्रमा में 5 से 8 घंटे |
| दिशा | गिरिराज जी को दाहिनी ओर रखते हुए (घड़ी की दिशा में) |
| आरंभ | आमतौर पर दानघाटी, गोवर्धन (कहीं से भी शुरू कर सकते हैं, वहीं समाप्त करें) |
| दो भाग | बड़ी परिक्रमा लगभग 12 किमी (आन्यौर, पूंछरी, जतीपुरा) और छोटी परिक्रमा लगभग 9 किमी (राधा कुंड, कुसुम सरोवर) |
| अच्छा मौसम | अक्टूबर से मार्च; गर्मियों में सुबह जल्दी या रात में |
| सबसे भीड़ वाले दिन | हर पूर्णिमा, गोवर्धन पूजा (10 नवंबर 2026), मुड़िया पूर्णिमा (18 जुलाई 2027) |
गोवर्धन की परिक्रमा क्यों की जाती है
श्रीमद्भागवत (दशम स्कंध, अध्याय 25) में कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों और गायों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उँगली पर सात दिन तक उठाए रखा। तभी से गोवर्धन को केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि गिरिराज जी, पर्वतों के राजा, के रूप में पूजा जाता है। भक्त उन्हें श्रीकृष्ण से अभिन्न मानते हैं।
गिरिराज जी की परिक्रमा भक्ति का एक रूप है। कुछ लोग जीवन में एक बार परिक्रमा करते हैं, तो ब्रज के बहुत से परिवार हर महीने पूर्णिमा पर परिक्रमा लगाते हैं। कुछ भक्त दंडवती परिक्रमा करते हैं, यानी पूरे मार्ग को बार-बार साष्टांग दंडवत करते हुए तय करते हैं, जिसमें एक सप्ताह या उससे अधिक लगता है।
परिक्रमा मार्ग: एक-एक पड़ाव
दानघाटी से शुरू करके घड़ी की दिशा में चलने पर मुख्य पड़ाव लगभग इस क्रम में आते हैं:
- दानघाटी: गोवर्धन कस्बे का गिरिराज जी मंदिर, जहाँ ज़्यादातर भक्त दूध चढ़ाकर (दुग्धाभिषेक) परिक्रमा शुरू करते हैं।
- आन्यौर: पर्वत पर बसा गाँव, जो अन्नकूट से जुड़ा है।
- गोविंद कुंड: पर्वत के पश्चिमी ओर का पवित्र कुंड।
- पूंछरी का लौठा: पर्वत के दक्षिणी छोर, यानी गिरिराज जी की "पूंछ", पर लौठा बाबा का मंदिर। मान्यता है कि लौठा बाबा परिक्रमा करने वालों की हाज़िरी लगाते हैं।
- जतीपुरा, मुखारविंद: गिरिराज जी का मुख माना जाता है, और श्रीनाथजी का मूल स्थान। यहाँ दूध का अभिषेक होता है।
- गोवर्धन कस्बे से होते हुए मानसी गंगा, गोवर्धन के बीचोंबीच विशाल पवित्र सरोवर।
- उद्धव कुंड, फिर राधा कुंड और श्याम कुंड, जो गौड़ीय वैष्णव परंपरा में सबसे पवित्र माने जाते हैं।
- कुसुम सरोवर: बलुआ पत्थर के घाट और जाट राजा सूरजमल की छतरियाँ; सूर्यास्त के समय विशेष रूप से सुंदर।
- वापस मानसी गंगा और दानघाटी, जहाँ परिक्रमा पूरी होती है।
बड़ी और छोटी परिक्रमा
गोवर्धन कस्बा परिक्रमा मार्ग के बीच में पड़ता है, इसलिए 21 किलोमीटर की परिक्रमा को अक्सर दो भागों में किया जाता है, जो दोनों कस्बे से शुरू होकर वहीं समाप्त होते हैं:
- बड़ी परिक्रमा (लगभग 12 किमी): दानघाटी → आन्यौर → गोविंद कुंड → पूंछरी का लौठा → जतीपुरा → वापस गोवर्धन।
- छोटी परिक्रमा (लगभग 9 किमी): गोवर्धन → उद्धव कुंड → राधा कुंड और श्याम कुंड → कुसुम सरोवर → मानसी गंगा।
कहीं-कहीं इन नामों को उलटा भी बोला जाता है। समय या शक्ति कम हो, तो एक दिन एक भाग और अगले दिन दूसरा भाग करें।
परिक्रमा के नियम
- गिरिराज जी को हमेशा दाहिनी ओर रखें और पूरी परिक्रमा घड़ी की दिशा में करें।
- परिक्रमा वहीं पूरी करें जहाँ से शुरू की थी। परिक्रमा को बीच में अधूरा छोड़ना अच्छा नहीं माना जाता।
- नंगे पैर चलना श्रद्धा पर है, नियम नहीं। कपड़े की चप्पलें रास्ते में मिलती हैं।
- पर्वत से पत्थर (शिला) न उठाएँ। इस विषय में परंपराएँ अलग-अलग हैं; संदेह हो तो मंदिर के बुज़ुर्गों से पूछें।
- परिक्रमा मार्ग को साफ़ रखें। कूड़ा कूड़ेदान मिलने तक अपने पास रखें।
- दानघाटी और मुखारविंद पर दूध, फूल या दीपक अर्पित कर सकते हैं। कई परिवार रास्ते भर दूध की धारा भी देते हैं।
- साथी परिक्रमार्थियों से "राधे राधे" कहें। पूरे रास्ते यही अभिवादन सुनाई देगा।
काम की बातें
- सुबह जल्दी निकलें। ज़्यादातर महीनों में सूर्योदय से पहले शुरू करने पर दोपहर की गर्मी से पहले परिक्रमा पूरी हो जाती है।
- सिर ढकें और पानी साथ रखें। रास्ते में चाय, पानी और नाश्ता मिल जाता है।
- ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों का ध्यान रखें, ख़ासकर रात में, जहाँ रास्ता साझा है।
- बुज़ुर्गों के लिए ई-रिक्शा से परिक्रमा करवा सकते हैं। किराया और रुकने की जगहें पहले तय कर लें।
- शांति चाहिए तो बड़े दिनों से बचें। पूर्णिमा और उससे पहले की एकादशी पर बहुत भीड़ रहती है, और मुड़िया पूर्णिमा पर करोड़ों श्रद्धालु आते हैं।
परिक्रमा का सही समय
दिन में परिक्रमा के लिए अक्टूबर से मार्च सबसे आरामदायक है। अप्रैल से जून तक दिन में तापमान 37 से 41 डिग्री तक पहुँच जाता है, इसलिए ज़्यादातर भक्त रात में या भोर से पहले परिक्रमा करते हैं। जुलाई से सितंबर तक बारिश और उमस रहती है।
भक्ति के सबसे बड़े अवसर हैं: कार्तिक मास (2026 में लगभग 26 अक्टूबर से 24 नवंबर), गोवर्धन पूजा और अन्नकूट (10 नवंबर 2026), और गुरु पूर्णिमा पर मुड़िया पूर्णिमा मेला (18 जुलाई 2027)।
परिक्रमा के लिए कहाँ रुकें
परिक्रमा मार्ग के पास रुकने से सुबह जल्दी निकलना आसान होता है और बाद में ठीक से आराम भी हो जाता है। व्रजराज फार्म्स एंड रिट्रीट पूंछरी पर, पूंछरी के लौठा से लगभग 2 किलोमीटर और जतीपुरा से 4 किलोमीटर दूर, गिरिराज जी के शांत दक्षिणी छोर पर है। आप पूंछरी से ही परिक्रमा शुरू करके यहीं समाप्त कर सकते हैं, और लौटकर ताज़ा भोजन, खुले खेत और शांत कमरे का आनंद ले सकते हैं।
बुज़ुर्ग माता-पिता या बच्चों के साथ परिक्रमा की योजना है? अपनी तारीख़ें बताइए, हम समय, मार्ग और वाहन की योजना बनाने में मदद करेंगे।