व्रजराज टीम, गोवर्धन · अंतिम बार जाँचा गया
गोवर्धन में रुकने की चार मुख्य जगहें हैं: दानघाटी और मानसी गंगा के आसपास का कस्बा, उत्तर में राधा कुंड, पर्वत के पश्चिमी ओर जतीपुरा, और शांत दक्षिणी छोर पूंछरी। ये सभी 21 किलोमीटर के गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर या उसके पास हैं। असली चुनाव भीड़ वाले मंदिरों से पैदल दूरी और शांति व खुली जगह के बीच है। यह जानकारी पूंछरी पर रहने वाले लोगों ने लिखी है।
| जगह | किसके लिए अच्छी | ध्यान रखें | दानघाटी से |
|---|---|---|---|
| गोवर्धन कस्बा (दानघाटी, मानसी गंगा) | बिना गाड़ी के आने वाले श्रद्धालु; दानघाटी से परिक्रमा | पूर्णिमा और त्योहारों की रात शोर और भीड़ | 0 किमी |
| राधा कुंड | गौड़ीय वैष्णव और इस्कॉन भक्त; सुबह कुंड दर्शन | अहोई अष्टमी पर भारी भीड़; कई जगह आश्रम के नियम | लगभग 5 किमी |
| जतीपुरा | मुखारविंद और श्रीनाथजी के दर्शन के लिए पुष्टिमार्गीय वैष्णव | ज़्यादातर समाज भवन और धर्मशालाएँ, बुकिंग ट्रस्ट से | लगभग 3 किमी |
| पूंछरी (व्रजराज) | परिवार, आराम से यात्रा, समारोह, पूरे ब्रज के लिए शांत आधार | दानघाटी पैदल दूरी पर नहीं; कस्बे तक 15 से 25 मिनट की ड्राइव | लगभग 7 किमी |
गोवर्धन कस्बा
ज़्यादातर श्रद्धालु यहीं रुकते हैं। भोर से पहले पैदल दानघाटी जाकर दुग्धाभिषेक कर सकते हैं और वहीं से परिक्रमा शुरू कर सकते हैं। यहाँ धर्मशालाओं, आश्रमों और साधारण होटलों का सबसे ज़्यादा विकल्प है। कमी यह है कि परिक्रमा कस्बे के बीच से गुज़रती है, इसलिए पूर्णिमा और त्योहारों की रातों में चौबीसों घंटे चहल-पहल रहती है।
राधा कुंड
राधा कुंड गौड़ीय वैष्णव परंपरा का हृदय है। बहुत से भक्त, जिनमें इस्कॉन के श्रद्धालु भी शामिल हैं, यहाँ के आश्रमों और गेस्ट हाउसों में रुककर कुंड में स्नान और कीर्तन करते हैं। सुबह का समय बहुत सुंदर होता है, पर अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि स्नान पर भारी भीड़ होती है।
जतीपुरा
जतीपुरा में गिरिराज जी का मुखारविंद है और वह पर्वत है जहाँ श्रीनाथजी की सबसे पहले सेवा हुई थी। इसलिए यह पुष्टिमार्गीय वैष्णवों के लिए गोवर्धन का केंद्र है। यहाँ के ज़्यादातर ठहरने के स्थान गुजराती, राजस्थानी और अन्य समाजों के भवन व धर्मशालाएँ हैं, जिनकी बुकिंग आमतौर पर ट्रस्ट से होती है।
पूंछरी
पर्वत का दक्षिणी छोर, यानी गिरिराज जी की पूंछ, उत्तर प्रदेश–राजस्थान सीमा पर खुले खेतों का इलाका है। हर परिक्रमा पूंछरी के लौठा से होकर गुज़रती है, पर यहाँ कोई कस्बा नहीं है, इसलिए रातें शांत और आसमान खुला रहता है। व्रजराज फार्म्स एंड रिट्रीट लौठा से लगभग 2 किलोमीटर, जतीपुरा से 4 किलोमीटर और दानघाटी से 7 किलोमीटर दूर है। बरसाना और मथुरा लगभग 27 किलोमीटर और वृंदावन लगभग 37 किलोमीटर दूर हैं।
बुकिंग से पहले क्या देखें
- परिक्रमा कहाँ से शुरू करेंगे, और भोर से पहले वहाँ कैसे पहुँचेंगे।
- पार्किंग, और क्या त्योहारों पर गाड़ी वहाँ तक पहुँच पाएगी। बड़े मेलों में अक्सर वाहन कस्बे के बाहर रोक दिए जाते हैं।
- परिक्रमा के बाद आराम: रात या भोर में परिक्रमा करने के बाद दिन में सोने के लिए शांत कमरा ज़रूरी है।
- बुज़ुर्गों के लिए: भूतल पर कमरा या लिफ़्ट, वेस्टर्न टॉयलेट और सर्दियों में गर्म पानी।
- भोजन: क्या खाना वहीं मिलता है, और किस समय। परिक्रमा के दिन जल्दी नाश्ता और देर से भोजन बहुत काम आता है।
- त्योहारों की तारीख़ें: कार्तिक, गोवर्धन पूजा और मुड़िया पूर्णिमा के लिए जल्दी बुक करें।
मथुरा या वृंदावन में रुककर गोवर्धन आना
बहुत से लोग मथुरा या वृंदावन में रुककर एक दिन के लिए गोवर्धन आते हैं। ऐसा हो सकता है, पर इससे भोर से पहले परिक्रमा शुरू करने की सुविधा छूट जाती है और 1 से 2 घंटे की ड्राइव बढ़ जाती है। अगर यात्रा का मुख्य उद्देश्य गोवर्धन है, तो गोवर्धन में रुकें और यहीं से वृंदावन व मथुरा जाएँ।